Monk Fruit: ब्लड शुगर में क्यू दी जाती है मोंक फ्रूट खाने कि सलाह?

Monk Fruit: ब्लड शुगर के कारण लोग खाने पीने की चीजों के कारण अक्सर परेशान रहते हैं। डॉक्टरों के द्वारा इस समस्या में लोगों को अक्सर खाने पीने की चीजों पर और मीठा खाने पर रोक लगा दी जाती है। लेकिन, डायबीटीज मे मोंक फ्रूट खाना कितना फायदेमंद साबित हो सकता है देखते है आज के इस लेख में।

Monk Fruit: मोंक फ्रूट शून्य कैलोरी वाला और सफेद चीनी से अधिक मीठा होने के कारण इसका सेवन मधुमेह रोगियों के लिए बहुत सुरक्षित होता हैं। यह मोंक फ्रूट तीबेट और चीन के बुद्ध भिक्षुओं द्वारा निर्मित किया गया था। जिसके कारण इसे भिक्षु फल (monk fruit) भी कहा जाता हैं। यह एक नैचुरल स्वीटनर होने के कारण इसका डायबिटिक मरीजों को इस्तेमाल करने कि सलाह दी जाती है। ब्लड शुगर मरीजों को मीठे से दूर रहने की सलाह दी जाती है। लेकिन जितना मीठा खाने से दूर रहने की सलाह दी जाती हैं, उतना मीठा खाने का मन करता हैं। ऐसे में डायबिटिक लोग अक्सर सुरक्षित और शुगर फ्री चीजों की तलाश में रहते है। मार्केट में ऐसी कई चीजें उपलब्ध हैं, लेकिन मोंक फ्रूट(monk fruit) इन सबमें सुरक्षित पर्याय है, जो एक नैचुरल स्वीटनर तो है ही लेकिन शून्य कैलोरी होने कारण यह डायबिटीज को भी कंट्रोल में रख सकता है और वजन को भी कंट्रोल में रख सकता है। इस फल का इस्तेमाल औषधि के तौर पर और मिठाइयाँ बनाने के लिए भी किया जाता है। यह मोंक फ्रूट डायबीटीज और शुगर फ्री चीजों के तलाश में रहने वाले लोगों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बन सकता है। जानते हैं डायबिटिक मरीजों के लिए मोंक फ्रूट का उपयोग कैसे फायदेमंद हो सकता है। (Monk Fruit in Hindi)

Monk Fruit
Monk Fruit

मोंक फ्रूट मिठास का एक सुरक्षित पर्याय – monk fruit benefits in hindi

चीन के बौद्ध भिक्षुओं द्वारा मोंक फ्रूट निर्मित किया गया था। चीन में सफेद चीनी के बदले मोंक फ्रूट को एक्सट्रेक्ट करके के इस्तेमाल किया जाता है। शुगर फ्री और सफेद चीनी के तुलना में यह मोंक फ्रूट 150 से 200 गुणा अधिक मीठा होने के कारण इसका इस्तेमाल धीरे धीरे बाकी के देशों में भी किया जाने लगा है। जीरो कैलोरी और इसके अधिक मिठास के कारण यह फल दुनिया भर में प्रचलित होने लगा है। जीरो कैलोरी और कार्ब्स के कारण शुगर और वजन दोनों को ही नियंत्रण मे रखता है। इस फल में मोग्रोसाइड्स नामक एक कंपाउंड पाया जाता है। जिसके कारण इसकी मिठास सामान्य चीनी से अधिक होती है और यह फल डायबिटिक लोगों के लिए एक सुरक्षित पर्याय होता हैं। क्योंकि यह ब्लड शुगर को बढ़ने नहीं देता।

कैलोरी फ्री होता है मोंक फ्रूट

मोंक फ्रूट एक जीरो ग्लाइसेमिक इंडेक्स और जीरो कैलोरीज़ वाला होता हैं, जो शरीर में शुगर को हाइक नहीं होने देता। यह फल नैचुरली ही मीठा होने के कारण डायबिटिक पेशेंट और शुगर फ्री चीजों को पसंद करने वाले लोगों के लिए यह एक अच्छा पर्याय बन सकता हैं।

इंसुलिन पर असर नहीं

मोंक फ्रूट से सेहत को किसी भी तरह से नुक़सान नहीं होता। इससे इंसुलिन पर असर नहीं पड़ता जिससे शुगर हाइक नहीं होती।

कैंसर मे मोंक फ्रूट के फायदे

मोंक फ्रूट में एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी इन्फ्लेमेटरी इफैक्ट्स पाए जाते हैं, जो फ्री रेडिकल्स से लड़कर कैंसर से बचाए रखते हैं। कोलोरेक्टल कैंसर को रोकने में भी यह फल मदद करता है।

डाइजेशन के लिए है फायदेमंद

मोंक फ्रूट पाचन तंत्र के लिए बहुत अच्छा होता हैं। इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर मौजूद होता हैं, जो पाचन शक्ति को मजबूत करने मे सहायता करता हैं। गैस, कब्ज और अपचन को दूर करने मे फायदेमंद होता है मोंक फ्रूट। मोंक फ्रूट मल को सॉफ्ट बनाता है, जिससे पेट भी खुल कर साफ होता है।

बैली फैट करता है कम

मोंक फ्रूट में कैलोरी का प्रमाण शून्य होता है। जिस कारण इसका उपयोग करने से वजन नहीं बढ़ता। अगर आप भी बैली फैट, वजन और मीठा खाने से परेशान रहते हैं, तो आपको अपनी डाइट में मोंक फ्रूट का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।

डायबीटीज होने के क्या है संकेत?

शुगर बढ़ जाने पर अक्सर पेशेंट को बार बार पेशाब की समस्या परेशान करते रहती हैं। अचानक से वजन बढ़ना या कम होना। जख्म का घाव जल्दी से ना भरना। हाथ पैरों में झुनझुनी होना।

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डिस्क्लेमर : हेल्थ सीक्रेट्स पर हम आपके स्वास्थ और कल्याण के लिए प्रामाणिक जानकारी देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके बावजूद अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी डॉक्टर या चिकित्सक से सलाह परामर्श जरूर करें।

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