Nabhi purana: नाभी पुरान क्या होता है जाने फायदे, प्रक्रिया और सावधानियां

Nabhi Purana  दरअसल ऐक आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति है, जिसमे नाभी मे विशेष प्रकार के तेल डालकर की जाती है
क्या होता है जब हम नाभी मे तेल लगाते हैं, नाभी शरीर का ऐक ही ऐसा भाग है जिससे 72 हजार नाडीया जुडी होने के कारण ये शरीर के विभिन्न क्षेत्रों में ऊर्जा पहुंचाने का ऊर्जा प्रदान करने का काम करती है. अगर नाभी मे आप तेल लगाते हैं तो पैर से लेके सर तक फायदे ही फायदे देखने मिलेंगे. आयुर्वेद चिकित्सा मे नाभी पुराण का उपयोग प्राचीन काल से निरंतर जारी है | नाभी पुराण सिर्फ बीमारियों को ही ठिक नही करती बल्की ये शरीर को अंदर से भी स्वस्थ बनाए रखती है | जैस सबको ही पता है नाभी हमारे शरीर की मुख्य जड़ यानी केंद्र बिंदु है, जैसे किसी पेड़ की जड़ को पानी देने से पेड़ के बाकी हिस्सों को भी ऊर्जा प्रदान होती है | वैसे ही नाभि मे तेल लगाने से ये शरीर के सबसे गहरी परतो तक पहुंचता है |

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नाभी पुरान – What is Nabhi purana

शरीर की मुख्य जड़ होने से 90% serotonin गुड हार्मोंस नाभी के पास ही बनते है, जैसे ही हम जब कोई बुरी खबर सुनते हैं या फिर दिमाग पर तनाव आता है तो सबसे पहले पेट मे ही तकलीफ महसूस होती है, क्यू कि नाभी के पास के गुड हार्मोंस बिगड़ने के कारण ये शरीर के बाकी हिस्से के हार्मोंस को भी बिगाड़ देते है. इसीलिए आयुर्वेद मे इसे दूसरा दिमाग भी कहा गया है.

नाभी पुरान के फायदे – Nabhi purana Benefits
Nabhi Purana से जठर अग्नी बढ़ती है जिससे पाचन शक्ति मजबूत होती है, नाभी पुराण से नाभी के नीचे कि वायु संतुलित होती हैं जिसे आयुर्वेद मे अपान वायु कहा जाता है, जो पेल्विक सिस्टम को मजबूत करके वहां के टॉक्सिंस को बाहर निकालने मे मददगार होती है | नाभी पुराण करने से इसका सीधा प्रभाव मस्तिष्क पर पड़ता है जिससे मानसिक तनाव, चिंता, मानसिक संतुलन संतुलित रहता है. नाभी पुराण से ऐक नही बल्की कई तरीकेसे फायदे मिलते है | नाभी पुराण से वात, पित्त और कफ को ठिक किया जा सकता है.

नाभी पुराण उपयोग – Nabhi purana Uses
1 सरसों का तेल
सरसो का तेल विटामिंस, एंटी ऑक्सीडेंट और फैटी एसिड्स से भरपुर होता है इसके विटामीन E से ये स्किन के टोन को सुधारता है जिससे चेहरा साफ और चमकदार दिखने लगता है, सरसो के तेल में एंटी इन्फ्लेमेटरी और एंटी बैक्टिरियल प्रॉपर्टीज होती है जो किल मुंहासे रोकने मे मदत करता है | सरसो के तेल में भरपुर मात्रा में फैटी एसिड होता है जो स्किन को अंदर से मॉइश्चर करता है जिससे स्किन कोमल और मुलायम बनती है. नाभि मे रोज सरसो का तेल लगाने से स्किन टाईट होकर स्कीन की टेक्सचर मे सुधार आती है. नाभि मे सरसो का तेल लगाने से सर्दियों मे होट नही फटते, होट फटनी की समस्या सरसो के तेल से दो दिन मे ख़त्म हो जाती हैं | यदि बालो को सुंदर बनाना है, चमकदार बनाना है तो सरसो के तेल से नाभी पुराण अवश्य करे | नहाने के बाद नाभी मे अगर ऐक बूंद ही सरसो का तेल लगाया जाय तो उम्र बढ़ती है, कोई बिमारी छू नही पाती

2 नीम तेल
शरीर मे अगर पिंपल्स है फंगल इन्फेक्शन है या किसी भी तरीके का कोई स्किन प्रोब्लम है तो ऐसे मे नीम के तेल का उपयोग करना होता है, चाहे तो नीम के तेल को सरसो के तेल मे या फिर एरंड के तेल मे मिलाकर भी लगा सकते है
3 नारियल तेल
आंखो मे किसी भी प्रकार कोई दिक्कत हो आंखे लाल होना, आखों से पानी निकलना, जलन होना, खुजाना तो ऐसे मे नारियल के तेल से नाभी पुरान करनी चाहिए, यदी बाल सफेद हो रहे तो भी नारियल के तेल का उपयोग करना चाहिए.
4 एरंड तेल
चेहरे पर अगर पिगमेंटेशन हो डार्क सर्कल्स हो या स्किन ड्राय हो तो एरंड तेल से नाभी पुरान कर सकते हैं.
5 देसी घी
इम्यूनिटी सिस्टम खराब होने के कारण जल्दी जल्दी बीमार होने लगते हैं तो ऐसे मे देसी गाय के घी से नाभी पुरान करने से प्राण वायु शक्ति बढने लगती है
6 जैतून तेल
लीवर की समस्या के लिए जैतून के तेल से नाभी पुरान करनी चाहिए.
7 बादाम तेल
बादाम के तेल मे रेटिनॉल, विटामीन E, विटामीन K की मात्रा ज्यादा होती है जो आखों की क्षमता को बढ़ाकर आखों की नसों मे रक्त प्रवाह करता है और आंखो की पर्दो को चिकनाई प्रदान करता है. स्किन के प्रोब्लम भी नाभी पुरण से दूर होते हैं.
नाभी पुराण करने की प्रक्रिया – process of Nabhi Purana 
nabhi purana ज्यादातर सुबह खाली पेट करना होता है, नाभी पुरण करने में तेल को हलका सा गरम करे , नाभी मे तेल भरकर पाच से दस मिनट के लिऐ छोड़ना होता है फिर उसी तेल को क्लॉक वाइस हल्के से पेट पर मालिश करने होती है | या फिर रात मे सोते समय दो बूंद नाभि मे डालकर भी नाभी पुराण किया जा सकता है.
सावधानियां
नाभी पुरान करने में इस्तेमाल होने वाला तेल पूरी तरह से शुद्ध , बीना किसी आर्टिफिशियल कलर और खुशबू का होना चाहिए,
नाभी पुराण गर्भवती महिला या पेट के अल्सर वाले मरीजों को और हर्निया वाले मरीजों को नहि करनी होती. बाकी सारे लोग बेझीजक कर सकते है.

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