How To Prevent Asthma Attacks: कैसे बच सकते हैं अस्थमा के अटैक से

How To Prevent Asthama Attacks: कैसे बचे अस्थमा के अटैक से? जानते हैं आज की इस लेख में।

How To Prevent Asthama Attacks: दूषित हवा और बढ़ता प्रदूषण सांस की समस्या का एक बहुत बड़ा कारण बन गया है। जिससे अस्थमा की समस्याएं भी बढ़ने लगी है। अस्थमा यानी दमा फेफड़ों की एक पुरानी और जटिल (Chronic disease) बीमारी होती है। जिसमें मुख्य वायु मार्ग में सूजन आने से वायुमार्ग की जगह कम हो जाती है। जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है। जिससे पूरे साल भर भी सर्दी-खांसी की परेशानी बनी रहती हैं। दमा (Asthma) के लक्षण आमतौर पर तो सामान्य होते हैं। लेकिन इसमें मरीज भारी काम करने मे या थोड़ी दूर चलने से जल्दी से थक जाता है। इस स्थिति में मरीज को कभी कभी अस्थमा का अटैक भी आ सकता हैं। मुख्य वायुमार्ग में सूजन बढ़ जाने से यह स्थिति हो सकती है। मुख्य वायुमार्ग में सूजन बढ़ने से सांस लेना मरीज के लिए काफी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में मरीज के लिए क्रिटिकल स्थिति निर्माण हो जाती हैं। अस्थमा के अटैक अचानक भी आ सकते है। अचानक भी यह स्थिति निर्माण हो सकती हैं। ऐसे में मन मे यह सवाल आता है कि इस स्थिति से बचने के लिए क्या करना चाहिए? जानते है इस लेख मे डॉक्टर के विचार और सुझाव विस्तार से –

How To Prevent Asthma Attacks
How To Prevent Asthma Attacks

अस्थमा अटैक से कैसे बचा जा सकता है? How To Prevent Asthama Attacks In Hindi

मुख्य स्वास नलिका में सूजन बढ़ने से स्वतंत्र रूप से सांस लेने में दिक्कत होती हैं। वयस्क लोगों के प्रति इसकी संवेदनशीलता मे ज्यादा वृद्धि देखने को मिलती हैं। अस्थमा के अटैक से बचने के लिए कुछ चीजों से सावधानी बरतने की बहुत जरूरत होती है। जैसे धूल, तेज गंध, ठंडी चीजें, जानवरों से लगाव आदि जैसी चीजें अस्थमा मरीजों के लिए धोखादायक बन सकती हैं। अस्थमा मरीजों को नियमित प्राणायाम और समय पर दवाओं का सेवन करना बेहद जरूरी होता है। अस्थमा को मैनेज करने के लिए फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने वाली एक्सरसाइज की मदद ले सकते हैं। अस्थमा के लक्षणों पर निगरानी रखकर, कुछ डाइट फॉलो करकर, डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज और प्राणायाम के मदद से अस्थमा (Asthma) को मैनेज करने की जरूरत होती है।

फेफड़ों की क्षमता को चेक करने के लिए कई लोग इसके मीटर का भी उपयोग करते हैं। इससे अस्थमा अटैक के लक्षणों को दूर करने मे मदद मिलती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि अस्थमा अटैक से बचने के लिए एक हेल्दी लाइफ स्टाइल मेंटेन करना बहुत जरूरी होता है। रोजाना डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज, प्राणायाम, फिजिकल एक्टिविटी, अपना घर और सोने वाली जगह को साफ सुथरा बनाएं रखना बहुत जरूरी होता है। अस्थमा को मैनेज करने के लिए आयुर्वेदिक डॉक्टर्स की ट्रीटमेंट काफी फायदेमंद साबित हो सकती हैं। मॉर्निंग वॉक, सुबह की साफ़ हवा इसमें बेस्ट दवां की तरह काम करती हैं।

अस्थमा का इलाज कैसे किया जाता है – How is asthma treated?

अस्थमा की पहचान करने के लिए कुछ मशीनरी प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है। लेकिन चलते समय सांस फूलना, सांस लेने कि दिक्कतें इन सारी लक्षणों से भी इसकी पहचान आसानी से की जा सकती है। एलर्जी और नॉन एलर्जिक इसकी पहचान कुछ जानकार आयुर्वेदिक डॉक्टर्स आसानी से कर लेते है। मूल कारणों का पता लगाने के बाद मरीजों को ट्रीटमेंट दी जाती है। जिसमें इम्यूनोथेरेपी जैसे ट्रीटमेंट शामिल होते है। यह ट्रीटमेंट अस्थमा के लक्षणों को कम करने मे, गट हेल्थ और ओवरऑल हेल्थ को सुधारने मे मदद करते हैं। अस्थमा अटैक की समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए आपको अपने जीवनशैली मे बदलाव करना जरूरी होता हैं। अगर आप इस अस्थमा के अटैक को दुर रखना चाहते हैं तो आपको अपने आस पास साफ सफाई रखना जरूरी होता हैं। अगर आपने इसके अटैक के लक्षणों को पहचान लिया तो इससे बचाव करने मे आसानी हो सकती हैं।

अस्थमा अटैक के कारण – Asthma attack ke karan

श्वसन मार्ग सिकुड़ने से श्वसन सम्बन्धी समस्याएं बढ़ने लगते हैं। इन कारणों से अस्थमा मरीजों को कभी कभी अस्थमा अटैक भी आ सकता हैं। जिन लोगों की प्रतिकार क्षमता कमजोर होती हैं, वे लोग उत्तेजक पदार्थों के संपर्क में आने से मुख्य वायुमार्ग में सूजन आने लगती हैं तथा चेस्ट कि धमनियां कमजोर होने से सांस लेने में दिक्कत होती है। कभी कभी अस्थमा का अटैक बिना किसी कारण भी हो सकता है। हर व्यक्ति के लिए इसके कारण और उत्तेजना देने वाले पदार्थ अलग अलग हो सकते हैं। जैसे –

* पालतू जानवर
* धूल के कण
* तंबाकू जन्य पदार्थ
* ठंडी चीजें
* थड़ी हवा
* अति तनाव
* बॉडी स्प्रे
* टेलकम पाउडर
* रूम स्प्रे
* धूप बत्ती
* जंक या प्रोसेस्ड फूड
* अति नमक का सेवन

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