Ayurvedic treatment for asthma: कैसे होता हैं आयुर्वेद मे अस्थमा का इलाज, कौनसी जड़ी बूटियां होती हैं फायदेमंद?

Ayurvedic treatment for asthma: खराब लाइफ स्टाइल, दूषित हवा और बढ़ते प्रदूषण के कारण अस्थमा के मरीजों में लक्षणीय बढ़ोतरी हो रही है। आयुर्वेद मे त्रिदोषों को संतुलित करके अस्थमा जैसे क्रोनिक डीजीस (Chronic disease) का इलाज किया जाता है। जड़ी बूटियों का इस्तेमाल करके अस्थमा को ठीक किया जाता है।

Ayurvedic treatment for asthma: आयुर्वेद में जड़ी बूटियों का इस्तेमाल करके अस्थमा को प्रभावी ढंग से ठीक किया जाता है। अस्थमा एक सांस की स्थायी (Chronic disease) और दीर्घकालिक चलने वाली बीमारी होती है। ये कई बार अनुवांशिक कारणों से भी हो सकती हैं। लेकिन दूषित हवा और बढ़ता प्रदूषण यह भी अस्थमा और सांस सम्बन्धित समस्याओं का एक प्रमुख कारण बन चुका है। दूषित हवा और बढ़ते प्रदूषण के कारण भारत देश में अस्थमा, सांस और फेफड़ों से संबंधित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हमारे देश में अस्थमा के इलाज के लिए लोग अक्सर एलोपैथिक दवाओं का सेवन करते हैं। लेकिन एलोपैथी का इलाज प्रभावी नहीं होता। वहां सिर्फ इनहेलर से दमा (Asthma) को कंट्रोल में रखा जाता है। वही जब बात आयुर्वेद चिकित्सा की आती हैं, तो आयुर्वेद मे त्रिदोषों को संतुलित करके अस्थमा (Asthma) को जड़ से ठीक करने पर जोर दिया जाता है। आयुर्वेद चिकित्सा में अस्थमा को ‘तमक श्वास’ कहा जाता है। मरीज के मुख्य वायुमार्ग में सूजन आने से, शरीर मे कफ़ दोष बढ़ने से और छाती मे बलगम जमा होने से सांस लेने में दिक्कत होती है। कई बार लोग इसे मौसम बदलाव का कारण या एलर्जिक सर्दी खांसी समझकर नजरंदाज कर देते है। लेकिन समय रहते इसपर ध्यान नहीं दिया गया तो यह धीरे-धीरे गंभीर रूप धारण कर लेता है, जिससे गंभीर समस्याओं से गुजरना पड़ सकता है। एलोपैथिक दवाओं में अस्थमा का इलाज उतना प्रभावी नहीं होता वहां सिर्फ उसे कंट्रोल में रखा जाता है। लेकिन आयुर्वेद मे त्रिदोषों (वात, पित्त, कफ) को संतुलित करके बीमारी को जड़ से खत्म किया जाता है।

Ayurvedic treatment for asthma
Ayurvedic treatment for asthma

आयुर्वेद के दृष्टि से अस्थमा

मानव का शरीर मुख्यता तीन दोषों से बना होता हैं, जिसे आयुर्वेद मे त्रिदोष (वात, पित्त और कफ) कहा जाता है। वात दोष और कफ दोष के बिगड़ने पर शरीर मे अस्थमा के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। कफ दोष के बढ़ने से छाती और श्वसन नलिकाओं मे बलगम जमा होते जाता है, जिससे वायुमार्ग में सूजन बढ़ने लगती है और सांस लेने में काफी दिक्कत होती है। इससे शरीर का वात दोष भी बढने लगता हैं। वात दोष और कफ दोष जब असंतुलित हो जाते है तब मरीज को सांस लेने मे रुकावट और बार बार सांस फूलने की समस्या का सामना करना पड़ता है। इसे ही मॉडर्न एलोपैथिक मेडिकल के भाषा मे दमा या अस्थमा कहा जाता है।

अस्थमा के कुछ प्रमुख लक्षण – Symptoms of asthma

नीचे बताए गए कुछ अस्थमा के लक्षण हो सकते हैं

1. साल भर बलगम की परेशानी

2. सांस फूलना

3. तेज़ गंध आने पर सांस लेने मे कठिनाई

4. अगरबत्ती, धूपबत्ती से परेशानी

5. सांस फूलना

6. गले से सीटी जैसी आवाज आना

7. छाती मे भारीपन

8. रात मे खांसी का बढ़ना

9. सर मे भारीपन

10. छाती मे जकड़न

अस्थमा के कुछ प्रमुख कारण – Causes of Asthma

अस्थमा होने के कई कारण हो सकते है। आयुर्वेद के अनुसार अस्थमा कई कारणों से हो सकता हैं।

1. आनुवंशिक कारण

2. कमजोर इम्युनिटी

3. पाचन तंत्र की गड़बड़ी

4. ठंडी चीज़ों का अधिक सेवन

5. चिंता और मानसिक तनाव

6. धूल और प्रदूषण

7. पेट ठीक से साफ ना होना

आयुर्वेद मे अस्थमा का इलाज कैसे होता है – How is asthma treated in Ayurveda?

आयुर्वेद चिकित्सा मे अस्थमा का इलाज सिर्फ दवा लेने तक ही सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें शरीर का जमा कफ, बलगम और टॉक्सिंस को बाहर निकालने की कुछ थेरपी भी शामिल होती हैं। आयुर्वेद मे इसे पंचकर्म कहा जाता है। इस थेरपी से शरीर मे जमा सारी गंदगी को बाहर निकाला जाता है। आयुर्वेद मे पंचकर्म को काफी महत्व दिया जाता है। जिसमें –

1. वमन : शरीर मे जमा बलगम और टॉक्सिंस को बाहर निकालने के लिए सबसे पहले वमन प्रक्रिया को किया जाता है। इसमें मरीज को उल्टी करवाई जाती है। वमन शरीर मे जमा कफ को बाहर निकालता है, जिससे वायुमार्ग की नलिकाएं भी ओपन हो जाती है। अस्थमा के लिए यह प्रक्रिया काफी फायदेमंद होती है। इससे डाइजेशन मे भी सुधार होता है।

2. विरेचन : विरेचन की प्रक्रिया भी शरीर की आंतरिक सफाई के लिए की जाती है। इसमें गंदगी को गुदवार से बाहर निकाला जाता है। आंतों मे चिपका हुआ मल बाहर निकलने से शरीर का पित्त कंट्रोल मे रहता है।

3. नस्य: इसमें नाक से तेल औषधि का उपयोग किया जाता है। इसमें वायुमार्ग को साफ किया जाता है। साइनस से बलगम को पतला करके बाहर निकालने के लिए नस्य प्रभावी होता है। नाक की नसों से बलगम को पूरी तरह से बाहर निकालने के लिए नस्य प्रक्रिया को किया जाता है।

कौनसी जड़ी बूटियां होती है अस्थमा में फायदेमंद

आयुर्वेद मे ऐसी कई जड़ी बूटियां है जो अस्थमा में फायदेमंद होती है। अस्थमा के लक्षणों को कम करके फेफड़ों को मजबूत करने मे मदद करते हैं।

1. अदरक – अदरक मे एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण होते है, ये श्वसन और नलिकाओं की सूजन को कम करने का काम करता है। इसके एंटी इन्फ्लेमेटरी इफैक्ट्स अस्थमा को मैनेज कर सकते है।

( तरीका – एक चम्मच अदरक के रस को एक चम्मच शहद के साथ सेवन करें)

2. तुलसी – सर्दी खांसी और अस्थमा मे तुलसी बहुत लाभदायक होती हैं। इसमें एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी बैक्टेरियल और एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं। तुलसी गले का बैक्टीरिया को दूर करने मे मदद करती है। बलगम के लिए तुलसी लाभकारी होती है।

(तरीका – एक चम्मच तुलसी के रस को एक चम्मच शहद के साथ सेवन करें)

3. मुलेठी – मुलेठी मे एंटी बैक्टेरियल गुण होते हैं। मुलेठी गले से बैक्टीरिया को खत्म करके खांसी, खराश को दूर करती हैं। मुलेठी का सेवन करते रहने से फेफड़ों को मजबूती मिलती है।

(तरीका – एक चुटकी मुलेठी पाउडर को एक चम्मच शहद के साथ सेवन करें)

4. अर्जुन छाल – अर्जुन की छाल फेफड़ों की मजबूती के लिए काफी मदद करता है। अर्जुन की छाल अस्थमा अटैक को प्रिवेंट कर सकता है।

(तरीका – 5 से 10 ग्राम अर्जुन छाल को दूध मे उबालकर सेवन करें)

5. अश्वगंधा – अश्वगंधा तनाव को मैनेज करता है। अश्वगंधा से मानसिक स्वास्थ्य को ठीक किया जा सकता है।

(तरीका – आधा चम्मच अश्वगंधा पाउडर को दूध मे मिलाकर सेवन करें)

6. हल्दी – हल्दी में एंटी इन्फ्लेमेटरी और एंटी बैक्टेरियल गुण होते हैं। हल्दी सर्दी जुखाम और बुखार मे फायदेमंद होती है।

(तरीका – एक ग्लास दूध मे हल्दी को उबालकर गुनगुना होने पर सेवन करें)

कितना समय लगता है आयुर्वेद मे अस्थमा के इलाज में?

आयुर्वेद मे अस्थमा का इलाज धीरे धीरे किया जाता है। लेकिन पूरी तरह से सुरक्षित और प्रभावी होता है। आयुर्वेद मे अस्थमा का इलाज 6 महीने से लेकर 1 साल तक चल सकता है। आयुर्वेद चिकित्सा मे इलाज धीरे धीरे से होता है, लेकिन बीमारी से पूरी तरह से मुक्ति मिल सकती हैं। आयुर्वेद मे पंचकर्म और जड़ी बूटियों से अस्थमा को ठीक किया जाता है। पंचकर्म, सही मार्गदर्शन और हेल्दी जीवन शैली का अनुसरण करने से अस्थमा का मरीज एक हेल्दी और आम जीवन को जी सकता हैं।

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डिस्क्लेमर : हेल्थ सीक्रेट्स पर हम आपके स्वास्थ और कल्याण के लिए प्रामाणिक जानकारी देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके बावजूद अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी डॉक्टर या चिकित्सक से सलाह परामर्श जरूर करें। यह लेख केवल वाचक और सामान्य जानकारी के लिए है।

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