Asthma ka Ayurvedic Gharelu Upchar: अस्थमा मे लाभदायक होते है ये 5 घरेलू उपाय

Asthma Ka Ayurvedic Gharelu Upchar: ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा (GINA) यह 1993 मे स्थापित हुआ एक विश्व स्वास्थ्य सहयोगी संगठन है। यह संगठन लोगों में अस्थमा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का काम करता है। इसका आयोजन (6 मई 2026) यानी विश्व अस्थमा दिवस पर किया जाता है। लोगों में अस्थमा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए 6 मई को इसकी शुरुआत हुई थी। अस्थमा के ट्रिगर से बचने के लिए और अस्थमा को मैनेज करने के लिए आज हम आपको कुछ घरेलू आयुर्वेदिक उपायों के बारे मे जानकारी साझा करने का प्रयास करेंगे।

Asthma Ka Ayurvedic Gharelu Upchar: भारत देश में फेफड़े और श्वास से संबंधित मरीज काफी बढ़ने लगे हैं। हाली मे हुऐ World Asthma Day पर अस्थमा और फेफड़ों से संबंधित मरीजों में काफी बढ़ोतरी देखी गई है। अस्थमा एक फेफड़ों से जुड़ा असाधारण और रेस्पिरेटरी रोग है। इस बीमारी के मरीजों को सांस लेने मे काफी घुटन और परेशानी महसूस होती है। अस्थमा मे मरीज को कभी कभी चलना और सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। आनुवंशिक कारणों से भी अस्थमा शरीर मे उतर जाता है। लेकिन धूल प्रदूषण और अनहेल्दी लाइफ स्टाइल भी अस्थमा का कारण बन सकते हैं। अस्थमा के अलग अलग कारण भी हो सकते हैं, जैसे कि बदलता मौसम, आस पास के एरिया की सफाई, तनाव आदि। इन कारणों से शरीर का वात और कफ दोष बढ़ता है जिससे फेफड़ों में बलगम जमा होने लगता है, जिससे वायुमार्ग ब्लॉक होकर सांस लेने मे काफी परेशानी महसूस होती हैं। अस्थमा का पूरी तरह से इलाज करना थोड़ा मुश्किल जरूर होता है, लेकिन आयुर्वेदिक उपचारों के मदद से इसको मैनेज और कंट्रोल में रखा जा सकता है। देखते है कुछ घरेलू नुस्खे, जो अस्थमा में फायदेमंद साबित हो सकते है। (Aathma ka Ayurvedic Gharelu Upchar)

Asthma ka Ayurvedic Gharelu upchar
Asthma ka Ayurvedic Gharelu upchar

अस्थमा के घरेलू उपचार – Asthma ka ayurvedic gharelu upchar

1. अदरक और लहसुन (Ginger and Garlic)

कफ और मुख्य वायुमार्ग में सूजन से अस्थमा उत्पन्न होता है। सूजन को कम करने के लिए अदरक को काफी प्रभावी माना जाता है। सर्दी जुखाम या वायरल फीवर की जब भी बात आती है तब अदरक को सबसे आगे रखा जाता है। अगर अदरक से बनी चाय के साथ लहसुन की एक दो कलियों को मिलाकर नियमित सेवन किया जाए तो यह आंतों मे जमा हुऐ कफ और बलगम को पतला करके बाहर निकालने के लिए काफी लाभकारी साबित हो सकती हैं। सूजन को कम करके अस्थमा के अटैक को इससे रोका जा सकता है। इसका सेवन आप रोजाना भी कर सकते हैं। लेकिन ग्रीष्मकालीन मौसम मे इसका इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले। क्योंकि यह तासीर मे गर्म होते है।

2. मुलेठी और अदरक (Licorice and Ginger)

अस्थमा यह मुख्यता सूजन (inflemation) के कारण ही होता हैं। मुलेठी यह इन्फ्लेमेटरी इफैक्ट्स से भरपूर होती है, जो इन्फ्लेमेशन को कम करने मे मदद करती हैं। आप मुलेठी का उपयोग आपके रोजके चाय के साथ भी कर सकते हैं या इसकी अलग से चाय बनाकर भी पी सकते हैं। आधा चम्मच मुलेठी पाउडर और आधा चम्मच अदरक को एक कप पानी में अच्छेसे उबलने दे। थोड़ा गुनगुना होने पर थोडासा शहद मिलाकर इसका नियमित सेवन करें। नियमित सेवन करने पर इससे अस्थमा के लक्षणों में काफी कमी आती है और अस्थमा नियंत्रित रखने में मदद मिलती हैं।

3. तेज पत्ता (Bay leaf)

तेज पत्ते को पीपली और एक चुटकी हींग के साथ थोड़े पानी के साथ उबाले। थोड़ा गुनगुना होने पर इसमें थोडासा शहद मिला लें। इसका सेवन आप रोजाना कर सकते हैं। इसके नियमित सेवन करने पर अस्थमा ट्रिगर को कम किया जा सकता है और बार बार होने वाले नजले जुखाम से मुक्ति मिल सकती हैं।

(यह भी पढ़ें – कैसे बच सकते हैं अस्थमा के अटैक से)

4. हल्दी और अदरक (Turmeric and Ginger)

अगर आप चुटकी भर मे कोई रेमेडी तैयार करना चाहते है तो आप अदरक और हल्दी का इस्तेमाल कर सकते हैं। हल्दी काली मिर्च और अदरक की चाय बनाकर इसे सीप सीप करके पी जाए। सबसे पहले थोड़ेसे अदरक, काली मिर्च और हल्दी को अच्छेसे उबाल लें। अगर इसका इस्तेमाल आप रोज करते हैं तो इससे आपके अस्थमा में काफी मदद मिल सकती है। इससे अस्थमा अटैक की संभावना को दूर रख सकते है।

5. शहद और दालचीनी (Honey and Cinnamon)

दालचीनी और तुलसी के कुछ पत्ते को एक ग्लास पानी के साथ उबालने के लिए रख दीजिए। दालचीनी और तुलसी के एंटी इन्फ्लेमेटरी और एंटी ऑक्सीडेंट इफेक्ट्स अस्थमा के ट्रिगर को कम करने मे मदद करते हैं। इसके एंटी इन्फ्लेमेटरी इफैक्ट्स सूजन को कम करने मे बहुत सहायता करते है। इसमें आप थोडासा शहद मिला सकते हैं। इस रेमेडी का इस्तेमाल आप रोजाना कर सकते हैं। नियमित सेवन करने पर अस्थमा के लक्षणों को काफी कम किया जा सकता है।

6. अर्जुन की छाल (Arjuna bark)

अर्जुन की छाल हृदय के स्वास्थ्य के लिए काफी अच्छी होती है। हृदय को स्वस्थ बनाएं रखने के लिए अर्जुन की छाल काफी फायदेमंद होती है। आयुर्वेद मे अर्जुन छाल के फेफड़ों के लिए काफी फायदे बताएं गए हैं। अस्थमा एक फेफड़ों से संबंधित बीमारी होने से अर्जुन की छाल इसमें काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। एक कफ दूध के साथ या अर्जुन छाल का काढ़ा बनाकर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

7. पीपल के पत्ते (Peepal leaves)

सबको पता ही है कि अस्थमा एक फेफड़ों की बीमारी है। कमजोर फेफड़ों के कारण अस्थमा की शिकायत होने लगती हैं। पीपल के पत्ते श्वसन संबंधी समस्याओं में गुणकारी होते हैं। पीपल के पत्तों से शरीर का ऑक्सीजन लेवल बढ़ने लगता हैं। पीपल के पत्ते कोलेस्ट्रॉल को कम करके सूजन को कम करने मे मदद करते हैं। जिससे हृदय स्वस्थ बना रहता है और सांस संबंधित समस्याओं से राहत मिलती है और हार्ट अटैक का खतरा भी कम होता है। पीपल के पत्तों का उपयोग काढ़ा बनाकर किया जाता है या इसके रस का भी उपयोग किया जा सकता है।

यहां और पढ़ें: कैसे होता हैं आयुर्वेद मे अस्थमा का इलाज, कौनसी जड़ी बूटियां होती हैं फायदेमंद

डिस्क्लेमर : हेल्थ सीक्रेट्स पर हम आपके स्वास्थ और कल्याण के लिए प्रामाणिक जानकारी देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके बावजूद अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी डॉक्टर या चिकित्सक से सलाह परामर्श जरूर करें। यह लेख केवल वाचक और सामान्य जानकारी के लिए है।

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